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History

हमारी यात्रा तब से शुरू होती है जब

एक दिन बोकारो के तेनुघाट से गुजर रहा था तो भारत माता की मंदिर पर नज़र गयी। अद्भुत मंदिर… कई बार याद करने की कोशिश की कि इस तरह का दूसरा मंदिर कही और है या नहीं पर मेरे दिमाग में कोई दूसरा चित्र अंकीत ही नहीं हो पाया। फिर जैसे इस मंदिर के बारे में जानना चाहा तब जाकर पता चला कि देश की आज़ादी में शामिल आसपास के बहुत सारे योद्धा हैं जिन्होंने महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर हमारे देश को आजादी दिलाई थी। तब समझ आया कि ये बहुत सारे योद्धा हैं कौन ये वा इंसान हैं जिन्होंने हमारे बारे में तब सोचा जब हम थे ही नहीं…. और हम क्या कर रहे हैं उनके लिए? आज उनके परिवार में कौन हैं, हमारी पीढ़ी शायद ही जानती होगी?

आसरा ने यह तय किया कि इस साल स्वतंत्रता दिवस के दिन हम झंडा तो फहराएंगे ही साथ ही हमारे आसपास के उन तमाम आज़ादी के दीवानों को भी याद करेंगे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सब कुछ झोंक दिया। आज़ादी के सिपाहियों के उत्तराधिकारियों से भी हम सभी लोगो को मिलवाएंगे और उनके पूर्वजों के शौर्य से लोगों का परिचय करवाएंगे । बेरमो अनुमंडल में ऐसे कई योद्धा थे जिन्होंने असहयोग आंदोलन में भी अपना योगदान दिया। स्वतंत्रता सेनानी रामदास चैला, रामेश्वर पाण्डेय, सरयू कादू, लालधारी काढू, सुखदेव प्रसाद, विद्याशंकर तिवारी, हरिपाल तिवारी, मो0 यासीन अंसारी, अनिरुद्ध पाण्डेय, होपन मांझी और लक्ष्मण मांझी के परिवार वालों से हमने संपर्क किया। हमारी छोटी सी कोशिश थी कि सभी स्वतंत्रता सेनानी परिवार के लोग एक मंच पर हों। आखिरकार वो घड़ी आयी और हमारी टीम उन परिवारों को भारत माता मंदिर के मंच पर एकत्रित करने, उन्हें सम्मानित करने, उनका और उनके पूर्वजों का परिचय अपने देशवासियों से करवाने में हम सफल रहे।

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यदि आप भी हमारे लक्ष्य के साथ जुड़कर स्वतंत्रता सेनानियों और देश के सैनिकों के परिवार के लिए कुछ करना चाहते हैं तो ASRA परिवार में आपका स्वागत है।

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